डश्यक् सख्या गीत

 

 


हिमलाल चौधरी

डानु डाडा हेनरि भालि डेओरि नोओरि
सखिर डानुरि डा डाडा रिउनारि करिले ।
टोहि मै समिह्रौ र आपन सरासटि
सखिर सरासटि बैठ गिड रि मोर आ ।
टोहि मै समिह्रौ रआपन ढनुखा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र पञ्चो भुइहार डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र डहर चण्डि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र मुह्रा महटउ डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र पालु गुनि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र डुढि बाघिन डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र बनसप्टि माटा डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र मुह्रामणि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र मुह्रामणि झाँख्रि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र जलकलबिलकल डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र खेटपाल डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र बुह्रिडेओ डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र जाखजखिनिया डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र मनसु डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र चबाहागुनि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र चबाहा मणि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र पाँच पाण्डो डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र पटनहि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र रुइना महुट्या डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र पिटरन्या डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र मड्डु गुनि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र बराहागुनि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र मणि झाँख्रि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र बल्यो गुनि डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र इसरल बिसरल डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।
टोहि मै समिह्रौ र झुकलचुकल डिउटा
सखिर हमार मेरहरियक करहो रक्षिया ।.. लग्ढार
घोराही–४, सुनपुर दाङ

अग्रासन खबर

अग्रासन खबर डटकम ‘लौव अग्रासन’ साप्ताहिक पत्रिकाको डिजिटल संस्करण हो। वि.सं. २०६५ मंसिर २४ गतेदेखि दाङको घोराहीबाट हरेक मंगलबार साप्ताहिक रूपमा प्रकाशित हुँदै आएको अग्रासन थारू भाषा, कला र संस्कृतिको संरक्षण तथा प्रवर्द्धनमा केन्द्रित पत्रिका हो।
प्रतिक्रिया दिनुहोस्

भर्खरै प्रकासित